मेवाड़ वर्तमान राजस्थान की अरावली की वादियों में आया हुआ स्वतंत्रता के स्वाभिमानी का स्थल है, जहा भगवान एकलिंगनाथ जी को समर्पित राज हुआ था, मेवाड़ के राजा भगवान सूर्यं नारायण एकलिंगनाथ जी और उनके दीवान बाप्पा रावल हुए थे.
बाप्पा रावल पशु प्रेमी थे, कृष्ण भगवान की तरह से गाये चराने का शौक था, दंत कथा में सुना जाता की बाप्पा रावल के पास एक गाय थी जिसका मालिक उसको पता नहीं था, गाय के मालिक का पता लगाने गाय के पीछे गये, गाय एकलिंगनाथ जी को अपने थन का दूध चढ़ा रही थी, उस एकलिंगनाथ जी की पूजा हारीत ऋषि करते थे, हारीत ऋषि के दर्शन लाभ से निरंतर मेल-मिलाप होता था, इन हारीत ऋषि के माध्यम से भगवान महादेव के दर्शन हुए थे,
बाप्पा का शाब्दिक अर्थ बाप, पिता होता है. पिता जैसे एक परिवार पालता है वैसे ही राजा एक प्रजा का पालन-पोषण, सरंक्षण, देश की रक्षा करना होता इसलिए उस राजा को बाप्पा से जनता समुदाय पुकारती थी, जो जनता से बाप्पा पद विभूषित हुआ.
वर्तमान में उदयपुर से उत्तर दिशा में 21 किलोमीटर दूर कैलाश पूरी अरवाली की पहाडीयो में स्थित है, बताया जाता है की इस मन्दिर का निर्माण 734 ईस्वी संवत में बाप्पा रावल ने बनाया था. इस मन्दिर के निकट हारीत ऋषि का मन्दिर है.
बाप्पा रावल पशु प्रेमी थे, कृष्ण भगवान की तरह से गाये चराने का शौक था, दंत कथा में सुना जाता की बाप्पा रावल के पास एक गाय थी जिसका मालिक उसको पता नहीं था, गाय के मालिक का पता लगाने गाय के पीछे गये, गाय एकलिंगनाथ जी को अपने थन का दूध चढ़ा रही थी, उस एकलिंगनाथ जी की पूजा हारीत ऋषि करते थे, हारीत ऋषि के दर्शन लाभ से निरंतर मेल-मिलाप होता था, इन हारीत ऋषि के माध्यम से भगवान महादेव के दर्शन हुए थे,
बाप्पा का शाब्दिक अर्थ बाप, पिता होता है. पिता जैसे एक परिवार पालता है वैसे ही राजा एक प्रजा का पालन-पोषण, सरंक्षण, देश की रक्षा करना होता इसलिए उस राजा को बाप्पा से जनता समुदाय पुकारती थी, जो जनता से बाप्पा पद विभूषित हुआ.
वर्तमान में उदयपुर से उत्तर दिशा में 21 किलोमीटर दूर कैलाश पूरी अरवाली की पहाडीयो में स्थित है, बताया जाता है की इस मन्दिर का निर्माण 734 ईस्वी संवत में बाप्पा रावल ने बनाया था. इस मन्दिर के निकट हारीत ऋषि का मन्दिर है.